वायरल हो गया है? घबराएं नहीं, ऐसे आप घर में ही कर सकते हैं इसका उपचार

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मानसून में तापमान में अचानक परिवर्तन होने या संक्रमण का दौर होने पर अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित होते हैं। ऐसा ही एक मौसमी संक्रमण वाला बुखार होता है वायरल बुखार। इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. अभिषेक शुक्ला की मानें तो इस बुखार से निबटने के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या कुछ ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) का सहारा लिया जाता है। वायरल का फीवर हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है, जिसकी वजह से शरीर में संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ता है। वायरल का संक्रमण बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंच जाता है।

क्या है वायरल
मानसून में लोगों को सबसे ज्यादा वायरल बुखार परेशान करता है। वायरल कई तरह के संक्रमण के कारण होता है। यहां तक कि कई वायरस भी वायरल का कारण बनते हैं। वायरल के दौरान आमतौर पर चक्कर आना, कफ-कोल्ड होना और गले में खराश जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। जब आप किसी वायरस से प्रभावित होते हैं तो सबसे अच्छा तरीका होता है उसे जड़ से खत्म कर देना। वायरल होने से शरीर में कुछ खास लक्षण दिखते हैं, जैसे गले में दर्द, खांसी, सिर दर्द, थकान, जोड़ों में दर्द के साथ ही उल्टी और दस्त होना, आंखों का लाल होना और माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि। बड़ों के साथ यह फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है।

नेचुरोपैथी है बेहतर
वैदिक ग्राम नोएडा के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. एन. राघवन कहते हैं कि वायरल के दौरान सही खानपान से आप न सिर्फ अपना इम्यून सिस्टम मजबूत कर सकते हैं, बल्कि वायरल फीवर को भी दूर कर सकते हैं। अगर बुखार 102 या इससे कम हो तो डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी बुखार को कम किया या इससे पूरी तरह आराम पाया जा सकता है। ध्यान रहे यह नेचुरोपैथी के उपचार हैं और इन्हें डॉक्टरी सलाह के स्थान पर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपका बुखार नहीं उतर रहा है तो आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।

इन्हें अपनाएं

तुलसी का काढ़ा
वायरल बुखार के लक्षण होने पर प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है तुलसी के पत्ते। एक चम्मच लौंग पाउडर को करीब 20 ताजा और साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। इस काढ़े का हर दो घंटे में सेवन करें। बैक्टीरियल विरोधी, कीटाणुनाशक, जैविक विरोधी और कवकनाशी गुण तुलसी को वायरल बुखार के लिए सबसे उत्तम बनाते हैं।

अदरक, हल्दी और शहद
वायरल बुखार से पीड़ित लोगों को परेशानी दूर करने के लिए शहद के साथ सूखे अदरक और हल्दी का उपयोग करना चाहिए। अदरक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसमें एंटी फ्लेमेबल, एंटीऑक्सिडेंट और वायरल बुखार के लक्षणों को कम करने के गुण होते हैं। पानी में दो मध्यम आकार के सूखे टुकड़े अदरक या सौंठ पाउडर को डालकर उबालें। दूसरे उबाल में अदरक के साथ थोड़ी हल्दी, काली मिर्च, चीनी आदि को उबालें। इसे दिन में चार बार थोड़ा-थोड़ा पिएं। इससे वायरल बुखार में आराम मिलता है।

धनिये की चाय
धनिये के बीज शरीर को विटामिन देते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाते हैं। धनिये में मौजूद एंटीबायोटिक यौगिक वायरल संक्रमण से लड़ने की शक्ति देते हैं। इसके लिए पानी में एक बड़ा चम्मच धनिये के बीज डालकर उबाल लें। इसके बाद इसमें थोड़ा दूध और चीनी मिलाएं। इसे पीने से वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।

चावल का माढ़
वायरल बुखार के इलाज के लिए प्राचीन काल से लोकप्रिय घरेलू उपाय है चावल स्टार्च या माढ़। यह पारंपरिक उपाय प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है। यह विशेष रूप से वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय के रूप में कार्य करता है। इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर गर्म-गर्म ही पिएं।

मेथी का पानी
रसोई में उपलब्ध मेथी के बीज में डायेसजेनिन, सपोनिन्स और एल्कलॉइड जैसे औषधीय गुण शामिल हंै। वायरल बुखार के इलाज के लिए नियमित अंतराल पर इस पेय को पिएं। मेथी के बीज, नींबू और शहद का मिश्रण तैयार कर उसका प्रयोग भी किया जा सकता है। मेथी के बीजों का प्रयोग अन्य बहुत सी बीमारियों के इलाज में किया जाता है और यह वायरल बुखार के लिए बेहतर औषधि है।

नींबू और शहद
नीबू का रस और शहद वायरल फीवर को कम करते हैं। शहद और नीबू के रस का सेवन भी कर सकते हैं।

सावधानियां

  • मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए।
  • मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामोल की एक गोली दे सकते हैं। दूसरी कोई गोली डॉक्टर से पूछे बिना न दें।
  • दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो मरीज को डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।
  • रोगी को पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट का सेवन करना चाहिए।

ताकि वायरल फीवर से बच सकें आप

तुलसी है रामबाण
यदि आपको वायरल बुखार से बचना है तो तुलसी का सेवन पूरे मानसून करना चाहिए। सुबह के समय एक कप चाय में तुलसी डालकर पीना चाहिए। इतना ही नहीं, तुलसी की पत्तियों को पानी में डालकर पीना भी फायदेमंद होता है।

अदरक की चाय
ब्लैक टी में अदरक का रस मिलाएं और एक चम्मच शहद डालें। हल्के गर्म पानी के साथ भी अदरक का रस ले सकते हैं। इससे गले को भी आराम मिलेगा और वायरल फीवर नहीं होगा। अगर वायरल फीवर दोबारा हुआ भी तो उससे जल्दी मुक्ति मिलेगी।

संतरे का करें इस्तेमाल
वायरल बुखार से बचने के लिए उस दौरान संतरे का जूस बहुत फायदा करता है। शरीर को मजबूती देने में संतरे का जूस बहुत फायदेमंद है। इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए घर में ताजा संतरे का जूस निकालकर पिएं। इससे शरीर को किसी भी तरह के संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।

लहसुन, पुदीना और सब्जियां
लहसुन को डाइट में शामिल करने से संक्रमण को जल्दी खत्म किया जा सकता है। पुदीने के सेवन से भी इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बुखार में भी आराम मिलता है। इससे भी प्राकृतिक तरीके से संक्रमण के असर को खत्म किया जा सकता है। सब्जियों का सूप पीने या फिर प्रोटीन और विटामिनयुक्त फल खाने से भी बुखार को आसानी से दूर किया जा सकता है। इसका कोई नुकसान भी नहीं होता।

 

सौजन्यः दैनिक हिंदुस्तान

 

http://www.livehindustan.com/anokhi/anokhi-online/story-viral-fever-and-naturopathy-1178117.html

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